गुरुवार, 12 फ़रवरी 2009

कुदरत


























कुदरत ने सनम तुमको क्या शोख अदा दी हैं






जुल्फों मैं दिए जादू आंखों मैं हया दी हैं






आलम हैं जवानी का उस पर नज़र ये कातिल रहो मैं तडपता हूं जरा देख तो ले संघ दिल






फूल सितारों से तेरी मांग सजा दूंगा तेरी चद्ती जवानी का मैं सजदा उतारूंगा






तुजहे चूम लू मैं दिलवर यही रब से दुआ दी हैं






कुदरत ने सनम तुमको क्या शोख अदा दी हैं






तू जान मेरी बन जा दुनिया से छुपा दूंगा






ओह मौसम के मेरे हमदम दोनों को दुआ दी हैं






कुदरत ने सनम तुमको क्या शोख अदा दी हैं






आसिक को सनम अपने ये कैसी सजा दी हैं

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